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कन्या विवाह तंत्र

आधुनिक समाज में कन्या का विवाह करना भी एक जटिल समस्या है। दिन प्रतिदिन विवाह योग्य कन्या के माता-पिता ज्योतिषियों, तांत्रिकों एवं साधू-महात्माओं की शरण लेते हैं तथा कन्या के लिए उत्तम वर प्राप्त हो जाए इसकी मनोकामना करते हैं। इस सम्बन्ध में मेरे पास भी नित्य ही केस आते हैं एवं विगत बीस पच्चीस वर्षो से प्रस्तुत तंत्र का प्रयोग करने मात्र से ही मैंने पाया है कि कन्या का विवाह तो हो ही जाता है साथ में वर एवं परिवार भी उत्तम प्राप्त होता है। अतः इस आशा के साथ कि इस तंत्र प्रयोग का लाभ आम जनता को मिले इसे यहां प्रस्तुत कर रहा हूं। पुनःश्च तंत्र प्रयोग एकदम सफल है एवं विगत वर्षों में हर वर्ष बीस-पच्चीस कन्याऐं इसके प्रयोग से दाम्पत्य सूत्र में बंध जाती हैं। ऐसा मैंने अनुभूत किया है। मात्र श्रद्धा विश्वास एवं कन्या द्वारा सही विधि से तंत्र प्रयोग करने पर सफलता निश्चित प्राप्त होती है।

तंत्र प्रयोग विधि-

विवाह इच्छुक कन्या को स्वयं ही यह तंत्र प्रयोग करना आवश्यक है। तंत्र को पूर्णतः गोपनीय तरीके से करना चाहिए। परम से परम हितैषी से भी छुपाकर करना है। तंत्र की सामग्री एकत्रित करते समय कोई टोका टोकी नहीं होनी चाहिए, और यदि टोका टोकी हो जाती है तो तंत्र प्रयोग का कार्य स्थगित कर दें एवं खरीदी हुई सामग्री को भी जल में विसर्जित कर दें तथा अगली बार तंत्र का प्रयोग करें। तंत्र का प्रयोग गुरूवार को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में करें एवं बुधवार की शाम तक तंत्र प्रयोग में आने वाली निम्न सामग्री एकत्रित कर लें:-

तंत्र सामग्री-
1. सात पीली सुपाड़ी   2. सात पीले सिक्के   3. सात पीले फूल   4. सात पीले जनेऊ   5. सात छोटी-छोटी गुड़ की डेली   6. सात हल्दी की गांठ   7. सत्तर ग्राम साबूत चने की दाल   8. सत्तर सें.मी. पीला कपड़ा    9. भोजपत्र का टुकड़ा 7 से.मी.   10.सात अंगुल लम्बी अनार की कलम  

उपरोक्त वस्तुओं में जो वस्तु पीली न मिले उसे हल्दी से रंग कर पीली कर लें।

विवाह यंत्र

ऊँ क्लीं ................................... (खाली जगह में कन्या अपना नाम लिखे)

मन वांछित वरं देहि वरं देहि
ह्रीं ऊँ गौरा पार्वती नमः

गुरूवार की सुबह कन्या ब्रह्म मुहूत्र्त में 4 बजे उठकर स्नान करे तथा धुले हुए वस्त्र धारण करने के बाद पूजास्थान या अन्य किसी पवित्र स्थान में बेठकर अपने सामने एक धुला हुआ पटा बिछाकर पटे के ऊपर पीले कपडे़ को बिछा ले एवं सबसे पहिले भोजपत्र के टुकड़े पर गीली हल्दी से अनार की कलम द्वारा उपरोक्त यंत्र को बना ले तथा इस यंत्र को पटे पर रख दे एवं ऊपर लिखी प्रथम सातों वस्तुओं को भी पीले कपड़े पर रख दें तथा धूप अगरबत्ती से समस्त वस्तुओं का पूजन करें। पश्चात गौरा पार्वती का ध्यान करें, एवं प्रार्थना करें कि उसे अति शीघ्र उसके अनुरूप योग्य वर प्राप्त हो जाए। प्रार्थना करने के उपरान्त उसी पीले कपड़े में यंत्र सहित समस्त सामग्री को बांधकर घर में ही किसी ऐसे गुप्त स्थान में छुपा देना चाहिए जहां किसी की नजर न पड़े। गौरा पार्वती की कृपा से छह माह में ही अच्दा जीवन साथी प्राप्त हो जाएगा और यदि किसी कारण वश ऐसा नहीं होता है तब पूर्ण तंत्र प्रयोग की सामग्री को छह माह पश्चात् जल में विसर्जित कर देना चाहिए एवं दुबारा उपरोक्त विधि से तंत्र प्रयोग करना चाहिए। यह सो.चकर कि पूर्व तंत्र प्रयोग में कहीं कोई कमी रह गई होगी। इस बार सफलता निश्चित ही मिलेगी। कार्य पूर्ण होने के पश्चात तंत्र सामग्री को जल में विसर्जित कर देना चाहिए। यह तंत्र प्रयोग नवरात्रि में गुरुवार के दिन करने से शीघ्र फलदायी है और अगली नवरात्रि आने से पूर्व ही विवाह संबंध हो जाता है ।

डा.महेश पारासर

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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